अभिनय
स्वरचित कृति।
*अभिनय*
*----------*
जीवन क्या है !!
एक मंच ही तो है
वही मंच जिसपे अलग अलग किरदार करते हैं अभिनय
अपने अपने काम में दक्ष रोज़मर्रा में निभाते हैं किरदारी
एक दूसरे से होता है अनुनय विनय
अपने पात्र की अदा करते हैं ज़िम्मेदारी
जो सामने होता है उसी के मुताबिक़ ओढ़ लेते हैं छौना
फिर होता है रूपांतरण
भावों का बातों का और विचारों का अंतरण
मंच पे होता है जिसका अभिनय अच्छा
जो छूता है दर्शक मन को
वही आगे बढ़ता जाता है
प्रशंसकों के दिलों में घर करता जाता है
पाता है धन को
हक़ीक़त भले कुछ और हो
पर बड़ी बात है अभिनय
जीवनमंच भी ऐसा ही
मन में जो हो
पर अभिनय से सामने वाले का दिल जीत ले
झूठा ही सही बना अपना मीत ले
वही तो जीवनमंच में बढ़ता आगे है
बाकी तो सब पीछे भागे है।
*#चन्द्र*
*अभिनय*
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जीवन क्या है !!
एक मंच ही तो है
वही मंच जिसपे अलग अलग किरदार करते हैं अभिनय
अपने अपने काम में दक्ष रोज़मर्रा में निभाते हैं किरदारी
एक दूसरे से होता है अनुनय विनय
अपने पात्र की अदा करते हैं ज़िम्मेदारी
जो सामने होता है उसी के मुताबिक़ ओढ़ लेते हैं छौना
फिर होता है रूपांतरण
भावों का बातों का और विचारों का अंतरण
मंच पे होता है जिसका अभिनय अच्छा
जो छूता है दर्शक मन को
वही आगे बढ़ता जाता है
प्रशंसकों के दिलों में घर करता जाता है
पाता है धन को
हक़ीक़त भले कुछ और हो
पर बड़ी बात है अभिनय
जीवनमंच भी ऐसा ही
मन में जो हो
पर अभिनय से सामने वाले का दिल जीत ले
झूठा ही सही बना अपना मीत ले
वही तो जीवनमंच में बढ़ता आगे है
बाकी तो सब पीछे भागे है।
*#चन्द्र*
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