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इतना मुश्किल भी नहीं है खुश रहना

*स्वरचित कृति* शीर्षक : *इतना मुश्किल भी नहीं है खुश रहना*  इतना मुश्किल भी नहीं है खुश रहना। तुम अपनी बाधाएं मुझे दो मैं उन्हें पार करने को तुम्हें सीढियाँ बना के दूँगा। जिसके बदले में तुमसे बस एक मुस्कान ही लूँगा। क्योंकि मुझे आता है सबकी खुशियों की नदी के साथ बहना। इतना मुश्किल भी नहीं है खुश रहना।। जब कभी दर्द बाहर ना निकल रहा हो अपने आँसुओं को दुनियाँ की सैर करा आना। वो घूम के आएंगे तो सुकूँ की खुशबू उनके साथ लाना कोई दुःख में हो तो "सब ठीक हो जाएगा" चार शब्द बड़े प्यार से कहना क्योंकि इतना मुश्किल भी नहीं है खुश रहना।। अपने अहम के पदवेशों को दरवाजे की दहलीज़ पे ही खोल आना चाहत के चोले को अपने तन पे ओढ़ आना कानों को  नैतिक मूल्यों के कुण्डलों से बिंधवा लेना नैनों में प्यार का चश्मा चढ़ाना रसना से बातों की चाशनी को चाट आना सही मायने में है यही असल गहना इसलिए इतना मुश्किल भी नहीं है खुश रहना।। *चन्द्र*